सरकारी नौकरी के नाम पर करोड़ों का खेल: फर्जी मार्कशीट गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 10 साल जेल काट चुका है आरोपी
रायगढ़: सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत कार्रवाई करते हुए रायगढ़ पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड विनोद कुमार राठौर को कोरबा से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पहले भी नकली नोट मामले में 10 साल की सजा काटी है।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
साल 2023 में भारतीय डाक विभाग द्वारा ‘ग्रामीण डाक सेवक’ (GDS) के पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस दौरान सक्ती के नरेंद्र कुमार और जांजगीर-चांपा की सोनम साहू ने नौकरी पाने के लिए आवेदन किया। हालांकि, जब डाक विभाग ने उनके दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) तमिलनाडु बोर्ड से करवाया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जो मार्कशीट जमा की गई थी, वे पूरी तरह फर्जी थीं। विभाग की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
3.5 लाख रुपये में ‘खरीदी’ सरकारी नौकरी
जांच में गिरफ्तार अभ्यर्थियों ने खुलासा किया कि उनकी मुलाकात कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर से हुई थी। आरोपी ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे 3 से 3.5 लाख रुपये की मांग की थी। आरोपी ने उन्हें जाली अंकसूचियां (Marksheets) उपलब्ध कराईं, जिनका इस्तेमाल कर वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए। मामला पकड़ में आते ही दोनों अभ्यर्थियों की नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी गई थी।
आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार, मास्टरमाइंड विनोद कुमार राठौर एक आदतन अपराधी है। वह वर्ष 2013 के एक नकली नोट मामले में 10 साल तक जेल में रह चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने फिर से ठगी का रास्ता चुना और बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर फर्जीवाड़े का जाल बिछाया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस की चेतावनी
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। रायगढ़ पुलिस ऐसे अपराधियों के खिलाफ अपना विशेष अभियान ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ निरंतर जारी रखेगी।



